Hindi Poem about thoughts and struggles: Sometimes, one’s internal conflicts are more difficult to handle than the external ones. The struggle and the fight with one’s own thoughts create so much uncertainty. Handling them at times is tougher than one could imagine. This poem is about such dystopian thoughts and struggles.
Hindi Poem about thoughts and struggles
अन्तर्युद्ध
विचारों के समन्दर में ये क्या बवंडर है?
ये क्या माजरा है,
ये क्या मंज़र है?
क्यूँ है परेशान ये दिल?
कुछ भी न कहा अभी.
पर बात तो निकलेगी कभी,
अभी जो मेरे अंदर है.
वक्त थम जाए कहीं,
या आसमाँ से मिल जाये जमीं,
पर दिल न खिलेंगे कभी,
ये जिस्म एक बंजर है.
इमारतें तो ढह चुकीं,
लोग चले गए सभी,
यहाँ कौन बुलबुल गायेगी अब?
ये रूह अब अरमानों का खंडहर है.
नलिन कुमार ठाकुर
उम्मीद है कि Hindi Poem about thoughts and struggles आपको पसंद आई होगी। अगर आप भी अपनी कविता या रचना हमारी साइट पर पोस्ट कराना चाहते हैं तो आप हमसे जुड़ सकते हैं। यहां क्लिक करके लिंक पर जाकर गूगल फॉम को भरें और इंतजार करें। आप हमारी दूसरी साइट Ratingswala.com को भी विजिट कर सकते है। वहां, मूवी, टेक खबरों के साथ साथ उसकी रिविव पढ़ने को मिलेंगे।
Read More: किश्तों में कट रही है ज़िंदगी | Short hindi poem about life